चालक किसान और शरारती बंदर की कहानी

एक गाँव में मोहन नाम का एक किसान एक किसान रहता था, वह केले की खेती करता था। वह एक मेहनती और बहुत भोला इंसान था । वह रोज कड़ी मेहनत करता और केले की फसल उगता था फिर उन केले को आस पास के बाजारों में बेचता था । इस तरह उसकी ज़िंदगी खुशी-खुशी बीत रही थी ।

एक बार जब मोहन केले लेकर पास के गाँव में बेचने जा रहा था, टीपू नाम का एक शरारती बन्दर पेड़ पर आराम करते हुए बैठा था, तभी उसकी नजर ढेर सारे केले ले जाते हुए मोहन पर पड़ी । ढेर सारे केले देख टीपू के मुँह में पानी आ गयी । वह पेड़ पर झूलते हुए उसने कुछ केले झपट लिए । मोहन दयालु था तो उसने बुरा नहीं माना, सोचा कि कुछ केले ही तो लिए है, बंदर भी भूखा होगा फिर वह बाजार की ओर चल पड़ा।

अगले दिन फिर से मोहन उसी रास्ते से केले लेकर गुजर रहा था, और एक बार फिर उस बंदर टीपू की नजर मोहन पर पड़ गयी, टीपू के जीभ से फिर लार टपकने लगी और फिर वह मोहन की टोकरी की ओर झपटते हुए ढेर सारे केले ले लिए । जिससे मोहन को काफी केलो का नुकसान हो गया । मोहन उदास हुआ पर सोचा कि आज हुआ तो हुआ रोज थोड़ी होता है ऐसा । परन्तु जब वह फिर से केले लेकर आ रहा था तब फिर से टीपू बन्दर ने सारे केले झपट लिए । जब मोहन उस बंदर को भागने की कोशिश करता तो वह पेड़ में चढ़ जाता पर किसी तरह वह केले झपट लेता था

अब मोहन बहुत ज्यादा परेशान हो गया था क्योकि अब तो उस बंदर को आदत पड़ गयी थी केले झपटने की। मोहन का बहुत नुकसान होने लगा था । मोहन को समझ नहीं आ रहा था कि वो ऐसा क्या करे कि उस शरारती बंदर टीपू से छुटकारा पा सके । वह रात भर सोचने लगा, तभी उसे एक तरकीब सूझी । अगले दिन टीपू ने केले की टोकरी में खूब सारा केले लिया और उसमे खूब सारा लाल मिर्च डाल दिया। अब मोहन वह टोकरी लेकर उस रास्ते की ओर चल पड़ा ।

उधर वह टीपू बंदर टकटकी लगाए देख रहा था कि कब मोहन आये और कब केले को झपट लू ।
जब मोहन उस पेड़ के पास पंहुचा तो मोहन ने उस बंदर को देख कर बोला “अरे टीपू जी पेड़ में क्या बैठे हो निचे आओ मै तुम्हारे लिए खूब सारे केले लाया हूँ। बंदर हैरान हो गया कि आज ये मोहन मुझे खुद से ही केले दे रहा है । टीपू लालच के मारे पेड़ से निचे उतरा और मोहन से पूछा कि ” क्यों आज खुद से ही मुझे केले खिला रहे हो क्या बात है ?”, फिर मोहन ने उसे बहाना बनाते हुए कहा “अरे टीपू जी आप तो भगवान हो आपको केले खिलाऊंगा तो मुझे आशीर्वाद मिलेगा “। फिर टीपू की छाती चौड़ी हो गयी और बोला ” हाँ मै तुम्हारा भगवान हूँ खिलाओ मुझे केले ” फिर मोहन उसे केले खिलाने लगा । टीपू ने एक बार में ही 3 4 केले अपने मुँह में ठूस लिया । तब टीपू को अचानक जोर की मिर्ची लगी, वो मिर्च के मारे आग बबूला हो गया और आह्हः अह्ह्ह अहह पानी पानी करते हुए वहाँ से भाग खड़ा हुआ ।

अगले दिन से टीपू उस पेड़ पर नजर नहीं आया , अब मोहन मजे से बाजार जाता और अपने केले बेच कर आता था, फिर से मोहन की ज़िंदगी खुशी खुशी बीतने लगी ।

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