मुर्ख लोमड़ी ” बल्लू ” | hindi story

मुर्ख लोमड़ी ” बल्लू ” |hindi story

एक जंगल में लोमड़ियों का एक झुण्ड रहता था, उस झुण्ड का सरदार ” तेजस्वी ” नाम का एक लोमड़ी था, वह अपने नाम के जैसे ही काफी तेजस्वी, बुद्धिमान, और ताकतवर था इसलिए झुण्ड के सभी लोमड़ी अपने सरदार की बहुत इज्जत करते थे, सभी उसकी कहा मानते थे और शिकार के समय तेजस्वी ही अपने झुण्ड की अगुवाई करता था । तेजस्वी का एक बेटा था, उसका नाम बल्लू था, वह बहुत बेवकूफ और आलसी किस्म का लोमड़ी था । जब भी झुण्ड के सभी लोमड़ी शिकार पर जाते तो वह अपने गुफा में सोते रहता था और जब सभी लोमड़ी शिकार कर अपना खाना लेकर वापस लौटते तो वह खाने की ओर झपट पड़ता था, सभी लोमड़ी उससे काफी नाराज होते थे क्युकी सभी ने काफी मेहनत की होती थी शिकार करने के लिए और बल्लू ने कुछ मेहनत नहीं की होती फिर भी ज्यादा खाने के लिए हक जमाता था ।



hindi story

एक बार सभी लोमड़ियों ने अपने सरदार से बल्लू की शिकायत की कि वह शिकार पर जाता नहीं है और जब हम शिकार करके आते है तो खाने पर ज्यादा हम जमाता है । इस पर झुण्ड के सरदार तेजस्वी ने बल्लू को समझाने की koshis की कि वह भी शिकार पर सब के साथ जाया करे और शिकार करने में अपना दिमाग और मेहनत लगाए । पर बल्लू अपने पिता तेजस्वी पर ही भड़क गया और अपने पिता को बोलने लगा कि ” आपको क्या लगता है मैं शिकार नहीं कर सकता, शिकार करना मेरे बायें हाथ का खेल है, मुझे किसी झुण्ड में शिकार करने के जरूरत नहीं मैं अकेले ही बड़े बड़े जानवरो का शिकार कर सकता हूँ “।
इतने में बल्लू के पिता तेजस्वी ने कहा ” ठीक है मैं भी तो देखूँ तुम अकेले शिकार कैसे करते हो, “। जिस पर बल्लू अकेले ही निकल पड़ा शिकार के लिए ।

उस वक्त बल्लू रास्ते पर यह सोचते सोचते आगे बढ़ रहा था कि आज वो अपने झुण्ड को दिखा देगा की वो सबसे ताकतवर है । तभी रास्ते पर बकरियाँ आते हुए नजर आयी, बल्लू झटपट दौड़ते दौड़ते उनके पास गया और उनसे बोलै कि ” मैं तुम्हे खा जाऊंगा ” । एक पर बकरियाँ डर गयी पर बकरियाँ चालक थी, एक बकरी ने बल्लू से बोली कि ” अब तुम हमे खाने वाले वो तो हमे आखरी बार प्रार्थना करने दो ” । इस पर बल्लू सोचा कि “अब तो मैं इन बकरियों को खाने वाला हूँ तो मैं इनकी आखरी इच्छा पूरी कर देता हूँ ” और बल्लू ने उन बकरियों को प्रार्थना करने देने के लिए तैयार हो गया । तब सभी बकरियाँ में में करके जोर जोर चिल्लाने लगी, जिस पर उन बकरियों के मालिक और उसके कुत्ते ने उन बकरियों की आवाज सुन ली और दौड़ते हुए उनके पास आ गए । बल्लू लोमड़ी कुत्ते और इंसान को देख डर गया और फिर वहाँ से भाग गया ।

अब बल्लू को अहसास हुआ कि उन बकरियों ने उसे बेवफूफ बना दिया । बल्लू को बहुत पछतावा हुआ फिर वह रास्ते पर सिर झुका कर चलने लगा तभी उसे थोड़ी दूर पर एक खरगोश नजर आया । वह झट पट दौड़ कर उस खरगोश के पास गया और उसे दबोच लिया और उस खरगोश को बोलै कि अब वो उसे खा जायेगा । इतने में खरगोश ने बोलै ” हाँ लोमड़ी महराज आप मुझे जरूर खा लीजिये, मैं तो आप का ही भोजन हूँ, आप मुझे चाव से खाइये ” । इस पर लोमड़ी बहुत खुश हुआ तभी खरगोश ने कहा ” अरे लोमड़ी महाराज आप इतने बड़े हो और मैं इतना छोटा मुझे खाकर आपका पेट नहीं भरेगा, एक काम करता हूँ इस बिल में मेरी पत्नी और बच्चे भी है, मैं अपनी पत्नी और बच्चो को भी लेकर आता हूँ । इतने में बल्लू बहुत खुश हो गया और सोचने लगा कि ” मैं कितना बुद्धिमान हूँ, बिना महनत करे मुझे इतना सारा खाना मिलेगा ” और फिर उसने उस खरगोश को छोड़ दिया और बोलै जल्दी जाओ और अपने पत्नी और बच्चो को लेकर आओ। खरगोश तुरंत अपने बिल में घुस गया और बाहर ही नहीं निकला और फिर अंदर से आवाज आयी ” अरे बेवकूफ लोमड़ी तू क्या मुझे खायेगा तेरे पास तो दिमाग ही नहीं है “। बल्लू फिर से बेफकूफ बन गया ।



hindi story

अब बल्लू निराश होकर आगे बढ़ने लगा। थोड़ी दूर चलते चलते उसे एक भैसा दिखाई दिया । बल्लू सोचने लगा कि ” अगर मैं इस भैसे का किसी तरह से शिकार कर लिया तो मेरे झुण्ड वाले मेरा लोहा मानने लगेंगे फिर तो साबित हो जायेगा कि वो सबसे ज्यादा ताकतवर है । बल्लू धीरे धीरे उस भैसे के पास गया और उस भैस को देख के गुर्राने लगा और अपने नुकीली दाँत दिखाने लगा, बल्लू को लगा कि ऐसा करने से भैसा उससे डर जायेगा । बल्लू ने आजतक कभी शिकार तो किया नहीं था इसलिए उसे पता ही नहीं था शिकार कैसे करते है और किसका करते है । वो उस भैसे को बोलने लगा कि “अब मैं तुम्हे खा जाऊंगा “। भैसा बोला “ठीक है तुम मुझे खा लो, एक काम करो तुम अपना मुँह खोलो मैं तुम्हरे पास आ जाता हूँ तुम मुझे पूरा खा लेना । बल्लू को लगा ये तो बहुत आसान शिकार है ये तो खुद मेरे मुँह में आ रहा है । बल्लू अपना मुँह खोल के खड़ा हो गया । सामने से भैसा दौड़ते दौड़ते आया और अपने सींग से बल्लू लोमड़ी को एक जोर की मार लगाई । बल्लू दूर जाकर गिर पड़ा और कराहने लगा । बल्लू वहाँ से भाग खड़ा हुआ और दूर जाकर कोने में बैठ के कराहने लगा ।



hindi story

अब बल्लू खाली पेट ही अपने झुण्ड की ओर लौट गया । बल्लू के पिता तेजस्वी ने बल्लू की हालत देख समझ गया कि इसकी खूब पिटाई हुई है । तब बल्लू के पिता उसे समझाने लगे ” शिकार करना इतना आसान नहीं होता, इसमें बहुत मेहनत लगती है ये बायें हाथ का खेल नहीं, इस काम में ताकत के साथ बुद्धि भी लगानी पड़ती है “। बल्लू अब समझ गया कि वो शिकार करने को जितना आसान समझता था उतना आसान नहीं है ।
बल्लू को अब पता चल गया कि वो कितने गहरे पानी में है । अगले दिन से बल्लू भी अपने झुण्ड वालो के साथ शिकार के लिए जाने लगा ।

और भी मजेदार कहानी पढ़ने के लिए हमारे साथ बने रहिये, कहानी पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *