जादुई कुआँ hindi story

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एक गाँव में चिंटू नाम का एक छोटा सा बालक अपनी दादी के साथ एक छोटे से घर में रहते थे । दादी चिंटू को बहुत प्यार करती थी, वह रोज चिंटू को कहानियाँ सुनाती थी । चिंटू बड़े ध्यान से दादी की कहानियाँ सुनता था, उसे दादी की कहानियाँ सुनने में बड़ा मज़ा आता था । एक दिन दादी ने चिंटू को एक जादुई कुएँ की कहानी सुननी लगी । दादी चिंटू को सुना रही थी कि ” दूर घनी जंगलों के बिच एक कुआँ, वह कुआँ जादुई है, अगर कोई उस कुँए में सिक्का डाल कर कुछ माँगता है तो उसकी सारी इच्छाएँ पूरी हो जाती है ” । चिंटू को ये कहानी बहुत पसंद आयी । वह रात भर यही सोचता रहा कि “काश मुझे वो जादुई कुआँ मिल जाय तो मैं अपनी सारी इच्छाएँ मांग लूँ”।

दादी और पोते की ज़िंदगी खुशी खुशी बीत रही थी । समय बीतते गया, अब चिंटू बड़ा हो गया था और दादी बूढी हो गयी थी । चिंटू अपने नौकरी को लेकर बहुत परेशान रहता था क्योकि वो जहाँ भी काम करता वहाँ से निकाल दिए जाता । चिंटू को लगने लगा था कि वो किसी काम के लायक नहीं है, जिस कारण चिंटू बहुत उदास रहता था । एक दिन दादी अचानक चल बसी, अब चिंटू बिलकुल अकेले हो गया था और बहुत दुखी रहने लगा । चिंटू का आत्म-विश्वास बिलकुल खो चूका था, वह दिन भर अपने घर में ही रहता । जिससे चिंटू की आर्थिक हालत खराब होने लगी थी । चिंटू दिनभर यही सोचते रहता कि अब वो क्या करेगा उसे कोई काम नहीं देता, उसकी ज़िंदगी कैसे चलेगी ।

एक रात चिंटू सोच रहा था तभी अचानक उसे दादी की उस जादुई कुएँ की कहानी याद आयी । चिंटू सोचने लगा कि “अब उसके पास खोने को कुछ नहीं है तो क्यों ना जादुई कुएँ कि खोज में निकला जाये, अगर वो जादुई कुआँ मिल गया तो मैं अमीर हो सकता हूँ” । अगली सुबह चिंटू तैयार होकर अपना झोला पकड़कर निकल गया जंगल की ओर।

चिंटू जंगल की रास्ते चलते गया तभी बिच रास्ते चिंटू की चप्पल टूट गयी । चिंटू सोच में पड़ गया कि “अभी तो सफर की शुरुआत की हुई है और मेरा चप्पल टूट गया अब मैं जंगल की उबड़ खाबड़ भरी रास्तो पर कैसे चलूँगा ” । तभी चिंटू को एक उपाय सुझा की क्यों ना पेड़ की छाल से अपने लिए एक चप्पल बनाया जाय । चिंटू ने अपने झोले में कारीगिरी का सामान लेकर आया था, उसने झट से अपने लिए एक जोड़ी चप्पल बना लिया । अब चिंटू चप्पल पहन कर आगे की ओर चल पड़ा ।

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चिंटू रास्ते पर चल रहा था तभी सामने से एक बूढ़ा आदमी दिखा, चिंटू सोचा क्यों ना एक बूढ़े आदमी से जादुई कुएँ के बारे में पता किया जाये । चिंटू ने उस बूढ़े आदमी को रुकवाकर उस जादुई कुएँ के बारे में पूछने लगा । उस बूढ़े आदमी को किसी जादुई कुएँ से बारे में कुछ पता नहीं था, वह आदमी चिंटू के चप्पल निहारने लगा और पूछा कि “तुमने ये चप्पल कहा से ली” ? चिंटू ने बताया कि उसने ये चप्पल खुद बनाई है । वह बूढ़ा आदमी बहुत उत्साहित हुआ और उसने चिंटू को अपने लिए भी वैसे ही चप्पल बनाने को कहा और बदले में उसे पैसे देने की बात कही । चिंटू मन गया और झट से उस बूढ़े आदमी के लिए एक जोड़ी चप्पल बना दिया । वह बूढ़ा आदमी चप्पल पाकर बहुत खुश हुआ और चिंटू को कुछ पैसे भी दिया । अब चिंटू आगे की ओर चल पड़ा ।

अब चिंटू को चलते चलते शाम हो गयी थी, चिंटू को हल्की हल्की ठण्ड भी लगने लगी । चिंटू सोचा क्यों ना पेड़ की पत्तो से अपने लिए एक जैकेट बनाया जाय । उसने लम्बे पत्तो वाला पेड़ तलाशने लगा तभी उसे एक पेड़ दिखा जिसके पत्ते लम्बे लम्बे थे । चिंटू ने झट से अपने लिए एक जैकेट बना लिया । अब चिंटू आगे के ओर चल पड़ा, तभी चिंटू को एक और आदमी आते हुए दिखा चिंटू उसके पास गया और जादुई कुआँ के बारे में पूछने लगा । पर उस आदमी को भी जादुई कुएँ के बारे में कुछ पता नहीं था ।चिंटू निराश हो गया, पर उस आदमी को चिंटू की जैकेट बहुत पसंद आयी । वह चिंटू से उस जैकेट के बारे में पूछने लगा । चिंटू ने बताया की वह उसने खुद बनाई है, उस आदमी ने चिंटू से एक जैकेट बनाने को कहा और बदले में पैसे लेने की बात बोली । चिंटू ने झट से उस आदमी एक लिए एक जैकेट तैयार कर दी । वो बहुत खुश हुआ, उसने चिंटू को पैसे दिए और धन्यवाद बोलकर चले गए ।

अब चिंटू अपने रास्ते आगे बढ़ने लगा, पर चिंटू को अब निराशा होने लगी थे पूरा जंगल छान मरने के बाद भी उसे कोई जादुई कुआँ नहीं मिल रहा था । चिंटू अब उदास होकर वापस लौटने की सोचने लगा । वह निराश मन से घर की ओर वापस लौटने लगा और सोच रहा था कि अब वो कभी अमीर नहीं हो पायेगा । तभी अचानक उसे वो आदमी मिला जिसने अपने लिए जैकेट बनवायी थी । उसने अपने साथ कुछ ओर आदमियों को लेकर आया था । चिंटू उन्हें देख कर हैरान हो गया, वह झिझकत हुए उससे पूछा “क्या हुआ सर जैकेट अच्छी नहीं लगी क्या “?? तब उस आदमी ने बोला – ” अरे नहीं, जैकेट तो बहुत अच्छी है, मेरे साथियो को भी बहुत पसंद आयी, क्या तुम मेरे साथियो के लिए थी ऐसी जैकेट बना दोगे”??

चिंटू ने हाँ बोल दिया और सभी के लिए जैकेट बनाई, सभी को जैकेट बहुत पसंद आयी और सब ने चिंटू को पैसे भी दिए । जाते हुए उन लोगो ने चिंटू का गाँव भी पूछा ताकि कभी और जैकेट बनवाने की जरूरत पड़े तो चिंटू के घर आ सके ।

अब चिंटू घर लौटने लगा, तभी रास्ते पर वो बूढ़ा आदमी मिल गया जिसके लिए चिंटू ने चप्पल बनाई थी । वो कुछ और इंसानो को लेकर आया था , वे सभी चिंटू से चप्पल बनवाना चाहते थे फिर चिंटू से सब के लिए चप्पल बनाई और सभी ने चिंटू को पैसे भी दिए । उन्होंने चिंटू को उसके गाँव का नाम भी पूछा । फिर चिंटू अपने घर वापस आ गया । चिंटू निराश था कि उसका यात्रा सफल नहीं हो पाया, उसे जादुई कुआँ नहीं मिल पाया । वो सोच में पड़ गया कि दादी उसे झूठी कहानियाँ सुनाती थी यही सोचते सोचते वो सो कहा । नींद में चिंटू के सपने में दादी आयी, चिंटू दादी को बोल रहा है कि ” आप मुझे झूठी कहानी क्यों सुनाती थी, कोई जादुई कुआँ नहीं होता “। तब इस पर दादी ने जवाब दिया ” बेटा जो असल ज़िंदगी में कड़ी मेहनत से काम कर लोगो को अपना मुरीद बना दे वही असल ज़िंदगी का जादू है, फिर तो कोई जादुई कुएँ की जरूरत नहीं पड़ती “।

अगली सुबह चिंटू की नींद खुली और वो रात के सपने के बारे में सोचते हुए बिस्तर में ही बैठा था । तभी उसे दरवाजे खटखटाने की आवाज आयी । वह बिस्तर से उठ कर दरवाजे खोलने गया । वह देखता है कि कुछ लोग आए है उसके घर पर जो उनसे चप्पल और जैकेट बनवाना चाहते है । चिंटू ने सबके लिए सामान बनाने का वादा किया और उनसे कुछ समय माँगा । चिंटू को दादी कि सारी बात समझ आ गयी कि यही तो है जादू सारे लोग उसके काम के मुरीद हो गए । चिंटू समझ चूका था कि वो एक कुशल कारीगर है ।

अब चिंटू कड़ी मेहनत करने लगा । वह रोज लोगो के लिए जूते, चप्पल और जैकेट बनता था । उसका काम अब बहुत बढ़ने लगा अब उसे खूब सारे पैसे मिलने लगा । चिंटू अपने मेहनत के दम पर अब अमीर होने लगा ।

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और भी मजेदार कहानी पढ़ने के लिए हमारे साथ बने रहिये । कहानी पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

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