.मैं तोर से मया करेंव अबला समझ के ।
तोर दद ह मारीच मोला तबला समझ के ।।

गुरुजी गुरुजी चाम चटिया ।
गुरुजी ल मारौं उठाके पटिया।।

मोर पाछू झन पड़ एक दिन बहुत पसताबे।
मोर कालेज के आघू म चाट के ठेला लगाबे।।

.बांमी नही टेंगना इही हमर रेंगना।
कांड़ी नही मूसर तै नही दूसर।।

तोर मया के बोली खातिर सुधबुध में ह गवां गेंव।
बिना पानी के मछरी बरोबर तड़प के में ह अधिया गेंव।।

जाथौं  बाजार बिसाथौं पापड़।
तोर जइसे लड़का ल लगाथौं झापड़।।

दिया अधूरा हे बाती के बिना ,नदिया अधूरा हे पानी के       बिना।
जिनगी अधूरा हे साथी के बिना ,अउ मैं अधूरा हौं तोर बिना।।

बीते बछर कस तैं ह संगी,भूल ज मोरो नादानी ल।
नवा बछर म मिल के रहिबो,जुग -जुग चलाबो मितानी ल।।

काम बुता ले थक के आवय तभो ,दद खेलावय तोला बइंहा म।
बाई के आते तैं सब ल भुलागे,कइसे दाई सोवाय तोला अचरा के छाइहा म।।

माँ हे गंगा माँ हे जमुना,माँ से हे तोर नाम।
एखरे सेवा करले रे भाई,माँ हे चारो धाम।।

.मैं जानत हौं तहूँ जियत होबे, तड़प-तड़प के।
मोरो उही हॉल हे, महुँ जियत हौं भटक-भटक के।।

कइसे कहौं के सुख म,जियत हौं तोर बिना।
सब ओइसने हाल हे, जइसे बिना पानी के मछली के जीना।।