मछरी खबड़ी डोकरी | cg story

मछरी खबड़ी डोकरी | cg story

एक ठन गाँव में एक झन डोकरा अउ डोकरी रहाय। दुनो झन बने खुशी खुशी रहात रिहिस, उँकर मन करा एक ठन मिट्ठू घलो रिहिस । मिट्ठू हा अब्बड़ बातूनी रिहिस, वो हा अब्बड़ चरर चरर के गोठियाय।
एक दिन डोकरा हा कथे ” आज मोला मछरी खाये के बिकट मन करत हे, जात हो साले ला तरिया पार कोती, मछरी धर के आवत हो ” । अइसे कहिके डोकरा अपन गरी ला धरिस अउ तरिया कोती निकल गे। अउ मस्त गाना गुन गुनावत जावत हे,

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“केवई मछरी ला धर पारेव, केवई मछरी ला धर पारेव,
ऐंठ के मारिस चिहर डारेव।
तोप के रक्खे हो गोड़ा तरी, तोप के रक्खे हो गोड़ा तरी,
दबा के धरिहा ऐ दरी ।

अउ अइसने गावत गावत डोकरा हा तरिया पार पहुंच गे । डोकरा अपन गरी ला लमइस अउ कांटा में एक ठन गेंगरवा ला फसाइस , तहाने तरिया कोती फेक के मारिस । डोकरा हा गरी ला धरे धरे इंतजार करत हे मछरी अब फसही, तब फसही कहिके । बिकट बेरा होंगे फेर मछरी नहीं धरावत रिहिस, डोकरा के जी खिसियागे । घाम के मारे डोकरा के मुड़ी तिप के रिहिस, डोकरा हा कथे ” भई गे साले ला आज तो मछरी नहीं धराये तइसे लागत हे, तभे डोकरा के गरी में उबुक-चुबुक होय बर लगिस । डोकरा हा गरी ला उचा के देखिस ता बड़े जन बामी मछरी धराय रिहिस । डोकरा एकदम खुश होंगे अउ तहाने डोकरा हा मछरी ला धरिस अउ अपन झोला में भरिस अउ अपन घर कोती जाय बर लगिस ।

डोकरा मस्त ख़ुशी खुशी घर आवत रिहिस अउ सोचत हे कि ” आज तो दबा के खाहु रे मछरी, साले ला बिकट बेरा होंगे, भूख के मारे पेट हा पोट- पोट करत हे, आज तो हकन के खाना हे “।

डोकरा घर पहुंच गे अउ डोकरी ला हुंकारू दिस ” डोकरी ऐ डोकरी, कहा मर गेस ” ।

ता डोकरी हा घर भीतरी ले हुंकारू दिस ” का होंगे डोकरा, कब्र अतीक चिचियावत हस ।

ता डोकरा हा कथे – ” ऐ देख तो बड़े जन बामी मछरी धर के लाने हो, चल तो जल्दी से मछरी ला रांध “।

डोकरी हा कुरिया भीतरी के निकल के देखिस अउ चौक के कथे – ” आई हाव् या बने बड़े जन मछरी हरे “।

तहाने डोकरा कथे – “बने तेल मसाला डाल के रांधबे ” ।

डोकरी कथे – ” हाव् ले बने ले राँधहु, बने नून, मिर्चा डाल के, अउ मोर राँधत ले जा ते नहा खोर के आजा “।

डोकरा कथे – “हाव् डोकरी बने केहे, जावत हो में हा नहा खोर के आ जथो जल्दी से “।

अउ तहाने डोकरा हा नहाय बर चल दिस । डोकरी हा मछरी ला बने तेल मसाला डाल के भुजत रिहिस । मस्त मछरी के खुसबू हा महमहावत रिहिस । डोकरा हा नहावत नहावत कथे ” वाह का मस्त महमहावत हे मछरी साग, ऐ खुसबू ला सूंघ के तो मोर पेट हा अउ पोट पोट करत हे “।

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अउ ऐ डाहान डोकरी ला मछरी के खुसबू सूंघ के लालच लागत रिहिस । डोकरी हा कथे ” एक पीस चीख के देखथों मछरी ला, नून मिर्चा बने लगे हे कि नहीं ते ” तहाने डोकरी हा एक पीस मछरी ला चीख के देखिस । डोकरी ला मछरी हा अब्बड़ मिठाईस । डोकरी हा एक ठन पीस अउ चिखिस । अइसने चिखत चिखत डोकरी हा सब्बो मछरी ला खा डरिस । अब डोकरी हा कढ़ाई ला देखथे ता कढ़ाई में झोरे झोर बस बाचे रहाय। डोकरी हा घबरा गे ” अरे सब्बो मछरी ला तो चिखत चिखत खा डारेव, अब डोकरा हा पुछही ता का बतहु ” । डोकरी टेंशन में आगे तभे डोकरी ला एक ठन दिमाग सूझिस । डोकरी हा टेटका, मेचका ला धर के कढ़ाई में भूंज दिस । अउ वो तरफ मिट्ठू हा डोकरी के कारनामा ला देखत रिहिस । डोकरा हा नहा धो के आइस अउ डोकरी ला कथे ” ले डोकरी जल्दी पोरस भात साग , अब्बड़ के भूख लागत हे, तोर मछरी साग हा तो मस्त महमहावत हे “।

डोकरी कथे ” हाव् ले डोकरा बइठ में तोला मछरी साग पोरसत हो ” । डोकरा हा बढ़िया चटाई बिछा के पालकी मोड़ के बइठ गे । अउ डोकरी हा टेटका मेचका ला पोरस दिस मछरी साग हरे कहिके । डोकरा हा साग ला देख के कथे “आज तो स्पेसल साग बने हे तइसे लागथे”। डोकरी कथे ” हाव् डोकरा बने नून मिर्चा डाल के बनाय हो बने पेट भर खा ले” । डोकरा हा जैसे एक कावरा मुँह में डारिस डोकरा कथे ” कइसे लिरबूट लिरबूट लागथे वो । डोकरी कथे ” अरे स्पेसल लिरबुटाहा वाला मछरी बनाय हाव् डोकरा, अब चुप चाप खा ज्यादा नखरा झन मार”। डोकरा हा अकबकात अकबकात सब्बो साग ला खाइस, तहाने डोकरा हा खा के जइसे उठिस वो डहर ले मिट्ठू हा नारिया के कथे – ” ऐ दे रे सब्बो मछरी ला डोकरी हा बोज डारिस अउ डोकरा ला टेटका, मेचका ला खवा दिस “। मिट्ठू के गोठ ला सुन के डोकरा के मुड़ी भन्नागे । डोकरा हा डोकरी ला कथे ” कइसे डोकरी ते मोला टेटका मेचका ला खवाय हस, तभे साले ला अकबकासी अकबकासी लागत रिहिस, कहाये साले डंडा हा तोला तो में अभी बताथो “। अतका सुनते ही डोकरी हा आव देखिस ना ताव, सब छोड़ छाड़ के पल्ला भगा गे ।

अउ मजेदार कहानी पढ़े बर हमर साथ बने रहिये । कहानी पढ़े बर आप मन के बहुत बहुत धन्यवाद ।

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