अमली पेड़ के परेतिन cg story

अमली पेड़ के परेतिन chhattisgarhi story

एक ठन गाँव में तरिया के पार मा एक ठन अमली के पेड़ रिहिस, उहा एक ठन परेतिन रिहिस । वो परेतिन हा बड़ा भयानक दिखे अउ रात कुन २ बजे अमली पेड़ ला हला हला के नाचे । वो गाँव के लइका मन बिकट डर्राये वो अमली पेड़ के तीर मा जाय बर, काबर की वो परेतिन हा लइका मन ला धर ले । लेकिन गाँव के जवान अउ सियान मन हा वो पेड़ के तीर मा जाय, अउ परेतिन से अपन इच्छा के चीज मांगे । परेतिन हा लोगन मन के इच्छा ला पूरा कर दे फेर बदला मा उंकर मन के कुछ न कुछ नुकसान होना पक्का रहाए।

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एक दिन एक झन माई लोगन हा वो पेड़ के तीर मा गिस अउ परेतिन ला पुकार लगाइस । परेतिन हा फट ले प्रकट होगे, वो माई लोगन हा घबरात घबरात परेतिन से अपन इच्छा जाहिर करिस कि ओकर सास हा कोंदी हरे ता ओहा बोले बर लग जाये कहिके । परेतिन हा ओकर इच्छा ला पूरा कर दिस, पर जब वो माई लोगन अपन घर आइस ता अचानक ओला सुनाई देना बंद होगे। वो माई लोगन हा भैरी होगे । जेकर से वो बहुत परेशान होगे अउ पूरा गाँव भर के आदमी ला सकल के अपन आप बीती ला बताये बर लगिस । वो माई लोगन के आप बीती ला सुन के सब गाँव वाले मन तय करिस कि अब गाँव के कोई लोग लइका वो पेड़ के तीर में नहीं जाय । गाँव भर में हाँका पर गे कि “तरिया के पार अमली पेड़ में कोनो झन जाहु हो……….” ।

वो दिन के बाद से कोनो लोग लइका मन वो पेड़ के तीर में नहीं जावत रिहिस, जेकर से परेतिन हा परेशान होगे कि ” मोर करा जवान, डोकरा कोनो नहीं आवत हे, अब मोर काम कैसे बनही “। परेतिन हा विचार करिस कि अब ये अमली पेड़ ला निकले बर पड़ही, पर परेतिन ला श्राप रिहिस कि जब तक कोई इंसान आके ओकर मदद नहीं करही तब तक वो परेतिन हा अमली पेड़ ले आजाद नहीं हो सके ।

एक दिन परेतिन हा एक ठन दिमाग लगाइस, अउ अपन उल्लू ला बुलाइस। वो हा उल्लू ला इंसान बना दिस अउ वो उल्लू ला एक ठन टोकरी में बहुत सारा फल सब्जी धरा के गाँव भेजिस, अउ गाँव वाले मन ला बोले बर किहिस कि अब परेतिन हा उंकर मन के नुकसान नहीं करे वो मन ला जो मांगना के खुशी- खुशी मांग सकथे। पर गाँव वाले मन चलाक रिहिस गाँव वाले मन समझ गे कि ये तो पक्का परेतिन के कोई चाल हरे गाँव वाले मन ला फसाये के । गाँव वाले मन हा वो पेड़ तीर में जाय से इंकार कर दिस ।

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एक रात कुन एक झन मनखे हा लालच में मारे वो पेड़ के तीर में चल दिस अउ परेतिन ला गुहार लगाइस । परेतिन हा खुशी से झूम उठिस अउ तुरते प्रकट होगे । परेतिन कथे ” का लागहि वत्स, खुल के बोल में तोर सब्बो इच्छा ला पूरी कर दुहुँ, पर बदले मा तोला मोर एक बात मानना पड़ही”। लालच के मारे वो मनखे हा हाव् बोल दिस अउ अपन इच्छा जाहिर करिस कि ” मोला एक झोला सोना के सिक्का चाहिए “। परेतिन हा अपन छड़ी घुमइस अउ एक ठन मंतर पढीस, तुरंत वो आदमी के सामने सोना के सिक्का से भराये एक झोला प्रकट होगे । वो आदमी बहुत खुश होगे अउ खुशी के मारे नाचे बर लग गे । अउ झोला ला उठा के वापस लहुटे बर लगिस, तभे परेतिन हा ओला आवाज लगाइस अउ बोलिस ” कइसे गा कहाँ जावत हस, मोर बात ला माने बिना ” । ता वो मनखे हा लहुट के पूछथे ” ले का होइस बता न वो परेतिन काय बात के गोठिया “। ता परेतिन हा कथे ” मोला तोर शरीर चाहिए “। वो मनखे हा घबरा गे कि परेतिन हा मोला खाने वाला हे कहिके । अउ परेतिन के सामने हाथ जोड़े बर लग गे कि मोला मत खा परेतिन में तोला एक्को कनक नई मिठहु । तब परेतिन हा कथे ” में तोर सरहा मांस ला खा के का करहु रे टुरा, मोला तो तोर शरीर में कब्ज़ा करना हे ताकि में ये पेड़ ले आजाद हो सको । तभे अचानक परेतिन हा एक ठन मंतर पढीस अउ वो आदमी के शरीर में कब्ज़ा कर लिस अउ वो आदमी ला भुत बना दिस । अब परेतिन हा अलकरहा हासे बर लग गे अउ वो आदमी के भुत हा रोये बर लग गे । परेतिन हा कथे ” अउ लालच कर, मार् वहा झोला भर सोना के सिक्का चाहिए तोला, कभू बाप जनम में देखे हस रे अतीक अकन सोना “।

अब परेतिन हा वो पेड़ ले आज़ाद होगे अउ ओकर बदला वो आदमी हा अमली पेड़ में कैद हो के रही गे । तेकर सती कथे संगवारी हो “लालच बुरी बला है”।

ऐसे ही मजेदार किस्सा कहानी पढ़ने के लिए हमारे साथ बने रहिये। कहानी पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

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